भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर Hardik Pandya एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका खेल नहीं बल्कि एक वायरल वीडियो है, जिसमें एक शख्स उनसे सेल्फी न मिलने पर गाली-गलौज करता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो ने फैंस और आम लोगों के बीच बहस छेड़ दी है — क्या सेलिब्रिटी होने का मतलब यह है कि वे हर वक्त हर किसी की फरमाइश पूरी करने के लिए मजबूर हों?
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है, कि क्रिसमस डिनर के बाद भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या अपनी गर्लफ्रेंड महिका शर्मा के साथ एक रेस्टोरेंट से बाहर निकल रहे थे। इस दौरान एक व्यक्ति उनके पास आकर सेल्फी लेने की ज़िद करता है। हालांकि हार्दिक ने शांति से मना कर दिया और आगे बढ़ने लगे।
इसी बात से नाराज़ होकर वह शख्स अचानक गुस्से में आ जाता है और कैमरे के सामने ही अपशब्द कहने लगता है। वीडियो में वह कथित तौर पर कहता सुनाई देता है –
“भाड़ में जाओ…”
इसके बाद माहौल असहज हो जाता है, हालांकि हार्दिक पांड्या पूरे समय शांत नजर आते हैं और बिना किसी प्रतिक्रिया के वहां से चले जाते हैं।
सोशल मीडिया पर दो धड़ों में बंटी जनता
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जहां एक वर्ग ने उस व्यक्ति की कड़ी आलोचना की, वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सेलेब्रिटीज़ को भी आम लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
लेकिन ज्यादातर यूज़र्स ने हार्दिक पांड्या का समर्थन किया और लिखा—
- “सेलिब्रिटी भी इंसान होते हैं, हर समय कैमरा फेस करना उनकी मजबूरी नहीं।”
- “ना कहना भी एक अधिकार है, गाली देना गलत है।”
- “प्राइवेसी नाम की भी कोई चीज़ होती है।”
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला मौका नहीं है जब किसी खिलाड़ी या अभिनेता को सेल्फी के चक्कर में असहज स्थिति का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी विराट कोहली, अनुष्का शर्मा, सारा अली खान और कई अन्य सितारे इस तरह की घटनाओं पर अपनी नाराज़गी जाहिर कर चुके हैं।
कई सेलेब्रिटीज़ साफ कह चुके हैं कि वे फैंस से प्यार करते हैं, लेकिन निजी समय और निजी स्पेस भी उतना ही ज़रूरी है।
क्या कहता है सोशल मीडिया कल्चर?
आज के दौर में सोशल मीडिया ने स्टार और फैन के बीच की दूरी जरूर कम कर दी है, लेकिन इसके साथ ही अधिकार की भावना (sense of entitlement) भी बढ़ी है। कई लोग यह मानने लगे हैं कि मशहूर चेहरों को हर वक्त उपलब्ध रहना चाहिए, जो कि व्यावहारिक और मानसिक रूप से सही नहीं है।
निष्कर्ष
हार्दिक पांड्या से जुड़ा यह वायरल वीडियो सिर्फ एक सेल्फी विवाद नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला मामला है। फेम और लोकप्रियता किसी की निजी आज़ादी नहीं छीन सकती।
सेल्फी लेना खुशी की बात है, लेकिन सम्मान और मर्यादा उससे भी ज़्यादा जरूरी।

