Raksha Bandhan 2026: भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है। यहां हर त्योहार के पीछे कोई न कोई धार्मिक, सामाजिक और भावनात्मक महत्व जुड़ा हुआ देखने को मिलता है। ऐसा ही एक पवित्र और भावनात्मक त्योहार है रक्षाबंधन। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व मुख्य रूप से भाई और बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है।
रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती है। वहीं भाई भी अपनी बहन की हमेशा रक्षा करने और जीवन के हर सुख-दुख में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है। इस तरह राखी का एक छोटा-सा धागा दो लोगों के बीच प्रेम और जिम्मेदारी के मजबूत रिश्ते का प्रतीक बन जाता है।
रक्षाबंधन का महत्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है। भारतीय परंपरा में रक्षासूत्र को शुभकामना, सुरक्षा और मंगलभावना से भी जोड़ा गया है। इस पर्व से भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी सहित कई पौराणिक कथाएं और लोक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। हालांकि इन कथाओं का विवरण अलग-अलग परंपराओं में अलग तरीके से मिलता है, लेकिन इनका मूल संदेश प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के लिए हमेशा खड़े रहने का है।
आधुनिक समय में भी रक्षाबंधन का महत्व कम नहीं हुआ है। भाई-बहन भले ही एक-दूसरे से दूर रहते हों, लेकिन राखी, फोन कॉल, वीडियो कॉल या उपहार के जरिए इस पवित्र रिश्ते को मनाते हैं। इसलिए रक्षाबंधन केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि परिवार को एक साथ लाने और रिश्तों में प्रेम एवं भावनाओं को और मजबूत करने वाला पर्व है।
राखी का एक छोटा-सा धागा हमें बड़ा संदेश देता है—सच्चे रिश्तों का बंधन दूरी से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और भावनाओं से मजबूत होता है। यही रक्षाबंधन की सबसे खूबसूरत विशेषता है। आइए जानते हैं कि इस साल रक्षाबंधन कब है, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा की विधि क्या है।
Raksha Bandhan 2026 कब है?
वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का त्योहार शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यह त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। 2026 में पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह समाप्त होगी।
रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त
अहमदाबाद के लिए 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय:
सुबह 6:21 बजे से 9:48/9:49 बजे तक
इस दौरान राखी बांधी जा सकती है। पंचांग के अनुसार भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी होगी, इसलिए 28 अगस्त की सुबह राखी बांधने में भद्रा का अवरोध नहीं रहेगा।
नोट: शुभ मुहूर्त शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
रक्षाबंधन 2026 की तारीख को लेकर क्या है स्थिति?
वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण शुक्ल पूर्णिमा यानी पूनम तिथि रहेगी। अहमदाबाद के पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि सुबह लगभग 9:48–9:49 बजे तक रहेगी।
इस साल रक्षाबंधन की तारीख को लेकर थोड़ा भ्रम हो सकता है, क्योंकि पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह करीब 9:48 बजे समाप्त होगी। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
2026 में रक्षाबंधन के दिन क्या खास है?
इस साल रक्षाबंधन के दिन भारत में एक आंशिक चंद्रग्रहण भी होने की बात कही जा रही है, लेकिन यह भारत से दिखाई नहीं देगा। इसलिए सूतक और धार्मिक नियमों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं।
धार्मिक अनुष्ठान और पूजा के लिए अपने स्थानीय पंचांग अथवा परिवार की परंपरा का पालन करना उचित रहेगा।
रक्षाबंधन 2026 के दिन चंद्रग्रहण
वर्ष 2026 में रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार के साथ एक खगोलीय घटना भी हो रही है। 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को आंशिक चंद्रग्रहण होने की जानकारी है। खास बात यह है कि यह घटना श्रावण पूर्णिमा के दिन हो रही है, जिस दिन भारत में रक्षाबंधन मनाया जाएगा।
चंद्रग्रहण कब होगा?
भारतीय समय के अनुसार चंद्रग्रहण का आंशिक चरण लगभग सुबह 8:03 बजे से 11:21 बजे तक रहने की जानकारी है। ग्रहण का अधिकतम चरण लगभग सुबह 9:42 बजे होगा।
हालांकि यह भारत में ग्रहण दिखाई देने का समय नहीं है, बल्कि वैश्विक ग्रहण की गणना से जुड़ा समय है। उस समय भारत में चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देगा।
यह चंद्रग्रहण दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में देखा जा सकेगा, जबकि भारत से यह दिखाई नहीं देगा। खगोलीय दृष्टि से यह एक गहरा आंशिक चंद्रग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करेगा।
अहमदाबाद में राखी बांधने का शुभ समय
राखी बांधने का मुख्य समय:
सुबह 6:21 बजे से 9:48/9:49 बजे तक
यह समय सूर्योदय से लेकर पूर्णिमा तिथि समाप्त होने तक का है। इसलिए यदि परिवार सुबह रक्षाबंधन की पूजा और राखी बांधने की विधि करना चाहता है, तो यह समय उपयोगी रहेगा।
चौघड़िया के अनुसार शुभ समय
अहमदाबाद में 28 अगस्त के चौघड़िया के अनुसार सुबह:
अमृत चौघड़िया: सुबह 6:21 से 7:56 बजे तक
शुभ चौघड़िया: सुबह 9:31 से 11:06 बजे तक
लेकिन यहां ध्यान रखना जरूरी है कि पूर्णिमा तिथि सुबह करीब 9:49 बजे समाप्त हो रही है। इसलिए राखी बांधने की मुख्य पूजा के लिए 9:49 बजे से पहले का समय चुनना अधिक उचित माना जाएगा।
सबसे अनुकूल समय कौन-सा है?
राखी बांधने के लिए सुबह 6:21 बजे से 9:48/9:49 बजे तक का समय महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
इनमें सुबह 6:21 से 7:56 बजे तक का अमृत चौघड़िया विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दौरान बहन भाई को तिलक करके, अक्षत लगाकर राखी बांध सकती है और आरती कर सकती है।
अगर इस समय राखी बांधना संभव न हो तो सुबह 9:31 से 9:48 बजे तक का शुभ चौघड़िया भी चुना जा सकता है। हालांकि यह समय काफी कम है, इसलिए पूजा और राखी की विधि के लिए सुबह का पहला शुभ समय अधिक सुविधाजनक रहेगा।
रक्षाबंधन के दिन पूर्णिमा तिथि सुबह लगभग 9:48–9:49 बजे समाप्त हो रही है। इसलिए राखी बांधने की मुख्य विधि सुबह ही पूरी कर लेना अधिक उचित रहेगा।
कौन-सा समय टालना चाहिए?
अहमदाबाद के पंचांग के अनुसार सुबह 7:56 से 9:31 बजे के बीच गुलिक काल बताया गया है। यदि परिवार चौघड़िया और अन्य शुभ-अशुभ समय को महत्व देता है तो इस अवधि को छोड़कर अमृत चौघड़िया या पूर्णिमा तिथि समाप्त होने से पहले के शुभ समय में राखी बांधी जा सकती है।
इसके अलावा राहुकाल सुबह 11:06 से दोपहर 12:41 बजे तक बताया गया है। हालांकि तब तक पूर्णिमा तिथि समाप्त हो चुकी होगी। इसलिए रक्षाबंधन की मुख्य राखी विधि के लिए सुबह का समय ही अधिक महत्वपूर्ण है।
रक्षाबंधन 2026: एक नजर में
| विवरण | समय |
|---|---|
| रक्षाबंधन | 28 अगस्त 2026, शुक्रवार |
| अहमदाबाद सूर्योदय | 6:21 AM |
| राखी बांधने का समय | 6:21 AM – 9:48/9:49 AM |
| अमृत चौघड़िया | 6:21 AM – 7:56 AM |
| गुलिक काल | 7:56 AM – 9:31 AM |
| शुभ चौघड़िया | 9:31 AM – 11:06 AM |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | लगभग 9:49 AM |
नोट: अलग-अलग पंचांगों में गणना की पद्धति के कारण समय में 1-2 मिनट का अंतर देखने को मिल सकता है। अंतिम पूजा और राखी की विधि के लिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
राखी बांधने से पहले क्या करें?
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें।
थाली में सामान्य रूप से ये चीजें रखी जा सकती हैं:
- राखी
- कुमकुम या चंदन
- अक्षत यानी चावल
- दीपक
- धूप
- फूल
- मिठाई
- आरती की थाली
- नारियल या अन्य प्रसाद
परंपरा के अनुसार भाई को पाटे या आसन पर बैठाकर पूजा शुरू की जाती है।
राखी बांधने की सरल विधि
सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम या चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद तिलक पर अक्षत लगाएं।
फिर भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। राखी बांधते समय भाई के सुख, स्वास्थ्य, लंबी आयु और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
इसके बाद भाई की आरती उतारें और उसे मिठाई खिलाएं। भाई भी अपनी बहन को अपनी क्षमता के अनुसार उपहार देकर प्रेम और रक्षा का वचन देता है।
रक्षाबंधन की पूजा कैसे करें?
रक्षाबंधन की पूजा बहुत सरल तरीके से की जा सकती है।
सबसे पहले भगवान गणेश और अपने इष्टदेव का स्मरण करके दीपक जलाएं। भगवान को फूल और प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर राखी बांधें।
पूजा के दौरान मन में प्रार्थना करें:
“हे भगवान, मेरे भाई को हमेशा सुखी, स्वस्थ और समृद्ध रखें। उसके जीवन में आने वाली हर परेशानी से उसकी रक्षा करें।”
इसके बाद भाई की आरती करें और उसे मिठाई खिलाएं।
राखी किस हाथ में बांधनी चाहिए?
परंपरागत रूप से बहन अपने भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है। राखी बांधने के बाद आरती की जाती है और भाई को मिठाई खिलाई जाती है।
रक्षाबंधन का महत्व
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का त्योहार नहीं है। यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और भावनाओं का प्रतीक है। समय बदलने के बावजूद इस पर्व की भावना आज भी उतनी ही मजबूत है।
इस दिन बहन अपने भाई के सुख और कल्याण के लिए प्रार्थना करती है और भाई भी अपनी बहन को जीवनभर साथ और सुरक्षा का वचन देता है। इसलिए रक्षाबंधन को प्रेम और पारिवारिक रिश्तों को और मजबूत बनाने वाला त्योहार माना जाता है।
राखी का एक छोटा-सा धागा हमें याद दिलाता है कि सच्चे रिश्ते दूरी से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनापन से मजबूत होते हैं। यही रक्षाबंधन की सबसे खूबसूरत भावना है।

