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TRAI New Rule: 1 नवंबर से अनजान कॉल पर दिखेगा कॉलर का नाम, जानिए CNAP फीचर से कैसे कम होगा फ्रॉड कॉल का खतरा

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TRAI New Rule 2026: अब अनजान नंबर से कॉल आने पर दिख सकता है कॉल करने वाले का नाम

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, सरकारी सेवाओं, नौकरी और बिजनेस से जुड़े ज्यादातर काम मोबाइल के जरिए पूरे होते हैं। लेकिन जहां मोबाइल और इंटरनेट ने लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, वहीं अनजान कॉल, फर्जी बैंक अधिकारी और साइबर ठगी जैसी समस्याएं भी लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।

अक्सर लोगों के मोबाइल पर किसी अनजान नंबर से कॉल आती है। कॉल करने वाला खुद को बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, पुलिसकर्मी या किसी बड़ी कंपनी का प्रतिनिधि बताता है। कई मामलों में ठग लोगों को डराकर या लालच देकर उनकी निजी जानकारी, बैंक डिटेल और ओटीपी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

इसी समस्या को देखते हुए मोबाइल यूजर्स के लिए Calling Name Presentation यानी CNAP सुविधा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। दूरसंचार विभाग (DoT) के 13 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर के अनुसार, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को 1 नवंबर 2026 से अपने नेटवर्क में यह सेवा शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत इनकमिंग कॉल के दौरान मोबाइल नंबर के साथ कॉल करने वाले का नाम भी दिखाया जाएगा। हालांकि, सुविधा का वास्तविक अनुभव नेटवर्क, फोन में सेव कॉन्टैक्ट और लागू तकनीकी व्यवस्था पर निर्भर कर सकता है।

इस नए नियम से यूजर्स को अनजान कॉल की पहचान करने में मदद मिल सकती है। लेकिन सवाल यह है कि CNAP आखिर क्या है, यह कैसे काम करता है और क्या इससे साइबर फ्रॉड पूरी तरह खत्म हो जाएगा? आइए विस्तार से समझते हैं।

  1. क्या है TRAI का नया CNAP नियम?

CNAP का पूरा नाम Calling Name Presentation है। यह टेलीकॉम नेटवर्क से जुड़ी ऐसी सुविधा है, जिसका उद्देश्य फोन पर आने वाली कॉल के साथ कॉल करने वाले की पहचान से संबंधित नाम दिखाना है।

अभी सामान्य रूप से जब किसी अनजान मोबाइल नंबर से कॉल आती है, तो फोन की स्क्रीन पर मुख्य रूप से नंबर दिखाई देता है। यदि वह नंबर कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव है, तो मोबाइल में सेव किया गया नाम दिखता है। लेकिन नंबर सेव नहीं होने पर यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि कॉल किस व्यक्ति या संस्था की ओर से आई है।

CNAP सुविधा इस समस्या को कम करने का प्रयास करती है। इसके तहत कॉल करने वाले का नंबर और टेलीकॉम रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित नाम दिखाया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी ऐसे नंबर से कॉल आती है जिसे आपने अपने मोबाइल में सेव नहीं किया है, तो स्क्रीन पर सिर्फ नंबर के बजाय उससे जुड़ा रजिस्टर्ड नाम भी दिखाई दे सकता है।

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने फरवरी 2024 में भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क में CNAP सेवा शुरू करने से संबंधित सिफारिशें जारी की थीं। इसके बाद इस सुविधा को लागू करने के लिए नियामकीय और तकनीकी स्तर पर कदम उठाए गए। स्रोत: TRAI की आधिकारिक वेबसाइट

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि TRAI ने इस विषय पर सिफारिशें दी थीं, जबकि अक्टूबर 2026 में सेवा लागू करने के संबंध में निर्देश DoT की ओर से जारी किया गया है।

  1. 1 नवंबर 2026 से क्या बदलने वाला है?

DoT के 13 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर में टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को 1 नवंबर 2026 से अपने संबंधित सेवा क्षेत्रों में CNAP शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

इस बदलाव के बाद मोबाइल यूजर्स को इनकमिंग कॉल के समय पहले की तुलना में अधिक जानकारी मिल सकती है।

इस व्यवस्था से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

नंबर के साथ नाम:

इनकमिंग कॉल के दौरान कॉल करने वाले का नंबर और उससे जुड़ा नाम दिखाने की व्यवस्था होगी।

सेव किए गए नंबर: यदि कॉल करने वाले का नंबर रिसीवर के फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव है, तो नियमों के अनुसार सेव किया गया नाम प्राथमिकता से दिखाया जाएगा।
अनजान घरेलू नंबर: कॉन्टैक्ट में सेव नहीं होने वाले घरेलू नंबर के लिए टेलीकॉम रिकॉर्ड में उपलब्ध कॉलर नेम दिखाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कॉल: निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कॉल पर नाम के बजाय “International Call” दिखाया जा सकता है।
टेलीकॉम नेटवर्क की भूमिका: इस सुविधा को लागू करने की जिम्मेदारी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं की होगी।

इसका उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना और यूजर्स को कॉल रिसीव करने से पहले बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है।

यह भी समझना जरूरी है कि नियम जारी होने का मतलब यह नहीं है कि हर फोन पर हर स्थिति में एक जैसा नाम दिखाई देगा। सेवा का प्रदर्शन नेटवर्क, तकनीकी अनुकूलता और लागू नियमों पर निर्भर कर सकता है।

  1. CNAP फीचर कैसे काम करेगा?

CNAP को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि मोबाइल नंबर और उससे संबंधित नाम की जानकारी टेलीकॉम व्यवस्था में किस तरह इस्तेमाल होती है।

जब कोई व्यक्ति मोबाइल फोन से कॉल करता है, तो कॉल उसके टेलीकॉम ऑपरेटर के नेटवर्क के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचती है। CNAP व्यवस्था के तहत कॉल करने वाले की पहचान से संबंधित नाम की जानकारी भी निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार रिसीवर तक पहुंचाई जा सकती है।

इसे आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हैं:

पहला चरण:

कोई व्यक्ति अपने मोबाइल से दूसरे नंबर पर कॉल करता है।

दूसरा चरण:

कॉल टेलीकॉम नेटवर्क के जरिए रिसीवर के मोबाइल तक पहुंचती है।

तीसरा चरण:

लागू CNAP व्यवस्था के अनुसार कॉल करने वाले नंबर से संबंधित नाम की जानकारी प्राप्त की जाती है।

चौथा चरण:

रिसीवर की कॉन्टैक्ट लिस्ट में नंबर सेव होने या नहीं होने के आधार पर निर्धारित प्राथमिकता लागू होती है।

पांचवां चरण: मोबाइल की स्क्रीन पर नंबर के साथ उपलब्ध नाम या अंतरराष्ट्रीय कॉल के लिए निर्धारित पहचान दिखाई जा सकती है।

इस तरह यूजर को कॉल उठाने से पहले कॉलर की पहचान के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है।

हालांकि, CNAP किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान की स्वतंत्र जांच करने वाला सिस्टम नहीं है। यह मुख्य रूप से टेलीकॉम रिकॉर्ड में उपलब्ध नाम को दिखाने के लिए बनाया गया है। इसलिए स्क्रीन पर दिखने वाले नाम को अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए।

  1. फ्रॉड कॉल की पहचान करने में कैसे मिलेगी मदद?

CNAP सुविधा का सबसे महत्वपूर्ण संभावित फायदा अनजान कॉल की पहचान करने में मदद मिलना है। भारत में साइबर अपराधी कई बार फोन कॉल के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में कॉलर से जुड़ा नाम दिखना यूजर्स के लिए एक अतिरिक्त संकेत हो सकता है।

बैंक अधिकारी बनकर ठगी करने वालों पर लगेगी रोक लगाने में मदद

कई बार ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों से कहते हैं कि उनका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है या केवाईसी अपडेट करना जरूरी है। इसके बाद वे ओटीपी, कार्ड डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी मांगते हैं।

CNAP से कॉल करने वाले का रजिस्टर्ड नाम सामने आ सकता है। इससे यूजर को कॉल के बारे में सवाल करने या बैंक के आधिकारिक नंबर से जानकारी की पुष्टि करने का मौका मिलेगा।

लेकिन अगर स्क्रीन पर कोई अनजान नाम दिखाई देता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि कॉलर निश्चित रूप से ठग है। इसी तरह किसी परिचित या भरोसेमंद संस्था का नाम दिखना भी कॉल को सुरक्षित साबित नहीं करता।

पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर आने वाली कॉल

साइबर ठगी के कुछ मामलों में अपराधी पुलिस, सरकारी विभाग या अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। वे कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बना सकते हैं।

ऐसी स्थिति में CNAP से मिलने वाला नाम एक अतिरिक्त जानकारी के रूप में काम कर सकता है। फिर भी केवल नाम के आधार पर किसी कॉल की सत्यता तय नहीं करनी चाहिए।

किसी सरकारी अधिकारी की पहचान की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक संपर्क माध्यम से ही करना बेहतर है।

फर्जी नौकरी और ऑनलाइन ऑफर

नौकरी दिलाने, लोन मंजूर कराने, इनाम जीतने या सस्ता सामान बेचने के नाम पर भी फोन कॉल के जरिए लोगों को निशाना बनाया जाता है।

कॉलर का नाम दिखने से यूजर को संदिग्ध कॉल पर अतिरिक्त सावधानी बरतने का मौका मिल सकता है। इससे जल्दबाजी में निजी जानकारी साझा करने या पैसे भेजने से पहले सोचने का समय मिलेगा।

बुजुर्गों और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों को फायदा

हर मोबाइल यूजर को स्पैम कॉल और साइबर ठगी की पहचान करने की तकनीकी जानकारी नहीं होती। विशेष रूप से बुजुर्ग लोगों के लिए अनजान कॉल की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

कॉल के साथ नाम दिखाई देने से उन्हें अतिरिक्त जानकारी मिलेगी। परिवार के सदस्य भी उन्हें समझा सकेंगे कि किसी कॉल पर भरोसा करने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की पुष्टि क्यों जरूरी है।

  1. CNAP के 7 बड़े फायदे

CNAP सुविधा केवल अनजान नंबर की पहचान तक सीमित नहीं है। इससे कॉलिंग के अनुभव में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  1. अनजान कॉल की पहचान में आसानी: नंबर के साथ नाम दिखने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि कॉल किसी परिचित व्यक्ति, व्यवसाय या अन्य रजिस्टर्ड यूजर की ओर से है।
  2. कॉल उठाने का बेहतर निर्णय: यूजर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तय कर सकता है कि कॉल उठानी है, बाद में संपर्क करना है या पहले उसकी पुष्टि करनी है।
  3. साइबर फ्रॉड के प्रति सतर्कता: संदिग्ध कॉल पर नाम दिखाई देने से यूजर को अतिरिक्त जांच करने का अवसर मिल सकता है।
  4. कॉलिंग में पारदर्शिता: केवल नंबर दिखाई देने की तुलना में नाम की जानकारी मिलने से कॉल रिसीव करने वाले को अधिक संदर्भ मिल सकता है।
  5. जरूरी कॉल छूटने की आशंका कम हो सकती है: अनजान नंबर से आने वाली हर कॉल को नजरअंदाज करने वाले यूजर्स के लिए नाम एक उपयोगी संकेत हो सकता है। इससे वास्तविक और जरूरी कॉल पहचानने में सहायता मिल सकती है।
  6. तीसरे पक्ष के ऐप पर निर्भरता कम हो सकती है: टेलीकॉम नेटवर्क के माध्यम से नाम दिखाने की सुविधा मिलने पर केवल कॉलर का नाम जानने के लिए अलग ऐप की जरूरत कुछ यूजर्स के लिए कम हो सकती है। हालांकि, स्पैम रिपोर्टिंग और अन्य सुविधाओं की जरूरत अलग हो सकती है।
  7. डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता: नाम और नंबर की जानकारी लोगों को कॉल की पुष्टि करने की आदत विकसित करने में मदद कर सकती है।

इन फायदों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सेवा कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है और यूजर्स इसका इस्तेमाल करते समय कितनी सावधानी बरतते हैं।

  1. क्या CNAP और Truecaller एक जैसे हैं?

कई मोबाइल यूजर्स के मन में सवाल है कि जब Truecaller जैसे ऐप पहले से कॉल करने वाले का नाम दिखाते हैं, तो CNAP की जरूरत क्यों है?

दोनों का उद्देश्य कॉलर की पहचान में मदद करना है, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली अलग है।

Truecaller जैसे थर्ड-पार्टी ऐप कॉलर की पहचान और स्पैम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अपने डेटा, यूजर रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध स्रोतों का इस्तेमाल कर सकते हैं। CNAP दूसरी ओर टेलीकॉम नेटवर्क और उससे संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर कॉलर नेम दिखाने की व्यवस्था है।

दोनों के बीच मुख्य अंतर इस प्रकार समझा जा सकता है:

आधार CNAP Truecaller जैसे ऐप
कार्यप्रणाली टेलीकॉम नेटवर्क आधारित थर्ड-पार्टी ऐप आधारित
नाम का आधार लागू नियमों के अनुसार टेलीकॉम रिकॉर्ड उपलब्ध डेटा और ऐप की पहचान प्रणाली
इस्तेमाल नेटवर्क पर उपलब्ध सुविधा के रूप में संबंधित ऐप की सुविधाओं के माध्यम से
स्पैम पहचान नाम से अतिरिक्त संकेत मिल सकता है, लेकिन नाम अपने आप स्पैम प्रमाण नहीं है ऐप में उपलब्ध स्पैम रिपोर्ट और पहचान सुविधाएं मदद कर सकती हैं
ऐप की जरूरत नाम दिखाने के लिए अलग ऐप अनिवार्य नहीं माना गया है ऐप की सुविधाओं के लिए ऐप का इस्तेमाल करना पड़ता है

CNAP और Truecaller को एक-दूसरे का पूरी तरह विकल्प मानना सही नहीं होगा। CNAP का मुख्य उद्देश्य कॉलर का नाम दिखाना है, जबकि कुछ थर्ड-पार्टी ऐप नाम के साथ स्पैम रिपोर्टिंग और अन्य अतिरिक्त सुविधाएं भी देते हैं।

दोनों ही स्थितियों में केवल स्क्रीन पर दिखाई देने वाले नाम पर भरोसा करके वित्तीय या संवेदनशील निर्णय नहीं लेना चाहिए।

  1. क्या CNAP के लिए इंटरनेट या अलग ऐप की जरूरत होगी?

CNAP की एक प्रमुख विशेषता यह है कि कॉलर का नाम दिखाने के लिए इसका उद्देश्य टेलीकॉम नेटवर्क की व्यवस्था का इस्तेमाल करना है। इसलिए केवल नाम देखने के लिए किसी अलग कॉलर आईडी ऐप या इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर रहना जरूरी नहीं होना चाहिए।

हालांकि, सेवा का वास्तविक अनुभव टेलीकॉम ऑपरेटर के नेटवर्क और फोन की तकनीकी अनुकूलता पर निर्भर कर सकता है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि प्रत्येक मोबाइल मॉडल और प्रत्येक नेटवर्क पर सुविधा एक ही तरह से काम करेगी।

यदि आपके फोन पर किसी अनजान कॉल के साथ नाम दिखाई नहीं देता, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, संबंधित सेवा अभी आपके नेटवर्क पर उपलब्ध न हो, फोन में तकनीकी अनुकूलता से जुड़ी समस्या हो या कॉल से संबंधित नाम की जानकारी उपलब्ध न हो।

ऐसी स्थिति में अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से जानकारी लेना उचित रहेगा।

  1. क्या मोबाइल में कोई सेटिंग बदलनी होगी?

CNAP को नेटवर्क स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था होने के कारण यूजर को केवल नाम दिखाने के लिए अलग ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। DoT के निर्देशों के अनुसार, यह सेवा यूजर्स को अलग से अनुरोध किए बिना उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित की गई है।

फिर भी, सभी फोन में एक जैसी सेटिंग या इंटरफेस होना जरूरी नहीं है। यदि आपके मोबाइल पर सुविधा उपलब्ध नहीं दिखाई देती, तो निम्नलिखित कदम उपयोगी हो सकते हैं:

अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से पूछें कि आपके नंबर और नेटवर्क पर CNAP सेवा उपलब्ध है या नहीं।
फोन के सॉफ्टवेयर और नेटवर्क सेटिंग्स को अपडेट रखें।
यदि समस्या बनी रहती है, तो मोबाइल निर्माता या टेलीकॉम ऑपरेटर की सहायता लें।
किसी अनजान वेबसाइट से CNAP चालू करने के नाम पर ऐप डाउनलोड न करें और न ही निजी जानकारी साझा करें।

ध्यान रखें कि CNAP चालू करने के नाम पर ओटीपी, बैंक डिटेल या भुगतान मांगने वाले संदिग्ध संदेशों से सावधान रहना चाहिए।

  1. CNAP की कुछ सीमाएं भी हैं, जिन्हें जानना जरूरी है

CNAP से कॉलर की पहचान करना आसान हो सकता है, लेकिन इसे साइबर सुरक्षा का संपूर्ण समाधान नहीं माना जा सकता।

रजिस्टर्ड नाम और कॉल करने वाले व्यक्ति में अंतर हो सकता है

मोबाइल नंबर किसी व्यक्ति के परिवार के सदस्य, कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड हो सकता है, जबकि फोन का इस्तेमाल कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा हो।

उदाहरण के लिए, यदि कोई मोबाइल नंबर परिवार के किसी सदस्य के नाम पर है और उसका इस्तेमाल दूसरा सदस्य करता है, तो कॉल पर रजिस्टर्ड नाम दिखाई देने की संभावना है। इससे कॉल रिसीव करने वाले को भ्रम हो सकता है।

हर स्पैम कॉल की पहचान अपने आप नहीं होगी

CNAP का मुख्य उद्देश्य कॉल करने वाले का नाम दिखाना है। यह जरूरी नहीं कि हर संदिग्ध कॉल पर स्पैम या फ्रॉड का स्पष्ट अलर्ट भी मिले।

इसलिए यूजर्स को स्पैम पहचानने के अन्य उपायों की जरूरत बनी रहेगी।

नाम दिखाई देने का मतलब कॉल सुरक्षित होना नहीं है

किसी कॉल पर बैंक, कंपनी या किसी परिचित व्यक्ति जैसा नाम दिखाई देने पर भी सावधानी जरूरी है। नाम के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि कॉल करने वाला वास्तव में उसी संस्था का प्रतिनिधि है।

गलत नाम की शिकायत करनी पड़ सकती है

यदि किसी नंबर से जुड़ा नाम गलत दिखाई देता है, तो यूजर को अपने टेलीकॉम ऑपरेटर के निर्धारित शिकायत माध्यम से इसकी जानकारी देनी चाहिए। सेवा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सही रिकॉर्ड और शिकायतों का समाधान महत्वपूर्ण होगा।

इन सीमाओं को समझकर ही CNAP का इस्तेमाल करना चाहिए। यह यूजर्स को अतिरिक्त जानकारी देने वाली सुविधा है, न कि किसी कॉल की सुरक्षा की गारंटी।

  1. साइबर फ्रॉड से बचने के लिए यूजर्स क्या करें?

CNAP लागू होने के बाद भी मोबाइल यूजर्स को अपनी डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना होगा। साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। इसलिए किसी भी कॉल पर निजी या वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।

सुरक्षित रहने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

OTP साझा न करें: बैंक, भुगतान या अन्य संवेदनशील खातों से संबंधित ओटीपी किसी अनजान कॉलर को न बताएं।
UPI PIN और पासवर्ड सुरक्षित रखें: कोई भी व्यक्ति कॉल करके आपका यूपीआई पिन या बैंक पासवर्ड मांगता है, तो सतर्क हो जाएं।
कॉल पर दबाव बनाने वालों से सावधान रहें: तुरंत पैसे भेजने, खाता बंद होने या गिरफ्तारी की धमकी देकर जल्दबाजी कराने वालों की बात पर बिना पुष्टि भरोसा न करें।
आधिकारिक नंबर से पुष्टि करें: बैंक या कंपनी के प्रतिनिधि होने का दावा करने वाले व्यक्ति की पहचान संबंधित संस्था के आधिकारिक संपर्क माध्यम से जांचें।
संदिग्ध लिंक न खोलें: कॉल के दौरान भेजे गए अनजान लिंक पर क्लिक करने या स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने से बचें।
निजी दस्तावेज साझा न करें: आधार, पैन, बैंक स्टेटमेंट या अन्य संवेदनशील दस्तावेज अनजान व्यक्ति को न भेजें।
संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट करें: यदि कोई कॉल ठगी की कोशिश लगती है, तो उसकी शिकायत उचित सरकारी या टेलीकॉम माध्यम से करें।

भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऑनलाइन शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी जा सकते हैं। यदि पैसे की ठगी हुई है, तो जल्द से जल्द शिकायत करना महत्वपूर्ण है।

  1. क्या CNAP से सभी फ्रॉड कॉल बंद हो जाएंगी?

यह सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक है। CNAP से कॉल करने वाले का नाम दिखाई देने पर अनजान कॉल की पहचान में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे सभी फ्रॉड कॉल बंद होने की गारंटी नहीं है।

साइबर अपराधी कई बार वास्तविक नंबरों, फर्जी पहचान, सोशल इंजीनियरिंग और अलग-अलग डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। वे किसी व्यक्ति का भरोसा जीतकर भी निजी जानकारी या पैसे हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

CNAP यूजर को कॉलर की पहचान से संबंधित अतिरिक्त जानकारी देता है। यह जानकारी संदिग्ध कॉल के बारे में सतर्क होने और उसकी पुष्टि करने में मदद कर सकती है। लेकिन किसी कॉल को सुरक्षित या असुरक्षित घोषित करने के लिए केवल नाम पर्याप्त नहीं है।

फ्रॉड कॉल पर प्रभावी नियंत्रण के लिए टेलीकॉम नेटवर्क की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, शिकायतों पर कार्रवाई और यूजर्स की जागरूकता भी महत्वपूर्ण है।

इसलिए CNAP को साइबर सुरक्षा की दिशा में एक उपयोगी कदम माना जा सकता है, लेकिन इसे अकेले सभी प्रकार की फोन ठगी का समाधान नहीं समझना चाहिए।

  1. CNAP नियम से आम मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा?

इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कॉल रिसीव करने वाले को अनजान नंबर के बारे में पहले से ज्यादा जानकारी मिल सकती है। इससे कॉल उठाने से पहले निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

जो लोग नौकरी, बिजनेस, डिलीवरी, बैंकिंग या सरकारी सेवाओं के लिए नियमित रूप से अनजान नंबरों से कॉल प्राप्त करते हैं, उनके लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है।

वहीं, बार-बार आने वाली अनचाही कॉल से परेशान यूजर्स को कॉल करने वाले के बारे में एक अतिरिक्त संकेत मिल सकता है। हालांकि, केवल नाम दिखने से अनचाही कॉल की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।

कुल मिलाकर, CNAP का महत्व इस बात में है कि यह कॉलर की पहचान को लेकर जानकारी का एक अतिरिक्त स्तर उपलब्ध कराता है। यदि यूजर्स इस जानकारी के साथ सुरक्षा संबंधी सावधानियां भी अपनाते हैं, तो उन्हें अनजान कॉल संभालने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

TRAI की सिफारिशों और DoT के नए निर्देशों के तहत CNAP यानी Calling Name Presentation सुविधा भारतीय मोबाइल यूजर्स के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है। 1 नवंबर 2026 से इसे लागू करने के निर्देश के बाद अनजान कॉल के साथ कॉलर का नाम दिखाने की व्यवस्था को विस्तार मिलने की उम्मीद है।

इस सुविधा से लोगों को कॉल रिसीव करने से पहले कॉलर की पहचान से संबंधित जानकारी मिल सकती है। इससे संदिग्ध कॉल के प्रति सतर्कता बढ़ाने, जरूरी कॉल पहचानने और साइबर ठगी से बचने में सहायता मिल सकती है।

हालांकि, CNAP को फ्रॉड कॉल रोकने का संपूर्ण समाधान नहीं माना जा सकता। टेलीकॉम रिकॉर्ड में दर्ज नाम और वास्तव में कॉल करने वाले व्यक्ति में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी भी कॉल पर बैंक डिटेल, ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड साझा करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

मोबाइल यूजर्स के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि कॉलर का नाम देखकर सतर्क जरूर रहें, लेकिन किसी कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि भी करें।


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